किताब का नाम :- माई
2nd गर्ल फ्रेंड
लेखक :- कैलाश राजपुरोहित / @authorkailashrajpurohit
भाषा :- हिंदी
कुल पेज :- 103
कीमत
Paperback :- 150
Kindle :- 69
यह किताब दो अधूरी प्रेम कहनियों पर आधारित है। ,कहानी के मुख्या पात्र कैलाश शर्मा है। शरुआती दौर से ही कैलाश को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। लेकिन फिर भी वह मेहनत करके अपने सपनों को पा लेता है और उसके बाद उनकी जिंदगी में आती है रिया , कैलाश को रिया से प्रेम हो जाता है। और वे शादी कर लेते है।
सबकुछ अच्छा चल रहा होता है लेकिन फिर कुछ ऐसा होता है की उन दोनों का तलाक हो जाता है। पहले प्रेम में मिले धोखे की वजह से लेखक वादा करता है की वह अब किसी से भी प्रेम नहीं करेगा और न ही दूसरी शादी
लेकिन फिर उनकी जिंदगी में आती है ज्योत्सना और लेखक को उनसे प्रेम हो जाता है और वह ज्योत्सना से शादी करने का प्लान बनाते है लेकिन वह शादी नहीं कर पाते।
कैलाश को दोनों दफा ही निरशा मिली है। न तो वे पहला प्यार पा सके न ही दूसरा।
क्या वजह रही होगी यह जानने के लिए आपको पूरी किताब पढ़नी पड़ेगी।
क्या दूसरा प्यार लेखक को मिला जाता , क्या हर बार लेखक की गलती थी या फिर हर बार उनका भाग्य उन्हें धोखा दे जाता है।
प्यार के आलावा इस कहानी में आम आदमी से जुडी समस्यायों को भी दर्शया गया है। किस तरह आम आदमी छोटी -छोटी चीजों के लिए संघर्ष करता है।
इस किताब को लेकर मेरे विचार :-
लेखक ने बड़ी चतुराई से इस कहानी को काल्पनिक कहानी कहा है लेकिन मैं नहीं मनाता की इस कहानी का हर पहलू पहलू काल्पनिक होगा कहानी के बहुत से हिस्से है जिनसे हर कोई अपने आपको जोड़ लेगा। और यही बात इस कहानी को काल्पनिकता से दूर और वास्तविकता के नजदीक लती है।
लेकिन अगर वास्तव में यह काहनी एक कल्पना से भरी है और हमें वास्तविक लगी है तो समझो लेखक ने बेहतरीन काम किया है इस किताब में।
भाषा और लेखन :-
किताब की भाषा सरल है। और लेखन प्रणाली भी बहुत ही साधारण और सरल है। व्याकरण और शब्दों में कोई भी त्रुटि और लापरवाही नहीं की गयी है। हिंदी को बढ़ावा देती एक और बेहतरीन किताब।


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