Buss Yun Hi by Harshita Vyas
My rating: 4 of 5 stars
किताब का नाम :- बस यूँ ही
लेखिका :- हर्षिता व्यास
कुल पेज :- 128
भाषा :- हिंदी
कीमत
Paperback :- 102
Kindle :-96
किताब के बारे में :-
शब्द किसके पास नहीं होते , हर एक व्यक्ति की अपनी एक कहानी होती है। हर व्यक्ति शब्दों से घिरा होता है - कुछ खूबसूरत ,कुछ दर्द भरे तो कुछ खुशनुमा अहसास जो हमें जोड़ता है अपनी यादों से। जब कभी बीते हुए समय की याद आती है तो हमें कभी मायूसी तो कभी ख़ुशी महसूस होती है - जैसे की बीते हुए स्कूल,कॉलज के दिन , बच्चपन के दिन , नाना-नानी का घर ये सब याद आते है।
इन्ही बीते हुए दिनों को कवियत्री हर्षिता व्यास ने बहुत ही खूबसूरत अंदाज में अपने शब्दों में इस किताब "बस यूँ ही " में संजोया है। यह किताब आपको , आपके जीवन के हर एक पहलु से जोड़ेगी।
और बैसे भी अगर आपको कविताओं से प्यार है तो आप इस किताब को जरूर पढ़ें।
लेखिका के बारे में :-
हर्षिता व्यास जी का जन्मस्थल भारत में राजस्थान है और वे फिलहाल नीदरलैंड्स में कार्यरत है। पिछले तीन वर्ष से फ़ूड टेक्नोलॉजिस्ट के पद पर कार्यरत। कविता सुनने का और कहानी सुनाने का शौक बचपन से ही था। लिखने का ख़याल कॉलेज में पढ़ते समय आया। हर्षिता व्यास जी अपने खाली समय में किताबें पढ़ने, गिटार बजाने और संगीत अभ्यास में समय बिताती हैं। पिछले दस सालों से इन्होंने कविता के रूप में अपने कई क़िस्से अपनी कॉपी के पन्नों के पीछे छुपाए हैं।
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