जीवन के अर्थ की तलाश में मनुष्य
Concept of This Book :-
यह किताब 1946 में विक्टर ई फ्रान्कल द्वारा लिखी गई
है | इस किताब में विक्टर
ने दिव्तीय विश्व युद्ध में नाजियों पर एकाग्रता शिविरों में हुए अत्याचारों के
बारे में लिखी गई है |
और विक्टर नें एक कैदी के रूप में अपने अनुभवों का
वर्णन किया है, और उन्होंने आपनी मनोचिकित्सा पद्धति का वर्णन किया है , जिसमें उन्होंने सकारात्मक महसूस करने के लिए जीवन में एक
उद्देश्य की पहचान करना और फिर उस परिणाम की पूरी तरह से कल्पना करना सिखाया है|
जब उन्हें 1946 के दिव्तीय विश्व युद्ध के दौरान एकाग्रता शिविरों में रखा गया था और उन शिवरों में रहने के दौरान जो –जो मुसीबतें सहन की उन सब के बारे में बतया गया है|
विक्टर को जब एकाग्रता शिविरों में लाया गया और
उन्हें किस हालत में रहना पड़ा, जहाँ न तो उन्हें खाने को सही खाना था और नहीं ही
रहने की सही व्यवस्था थी |
उनसे किस तरह से जानवरों की तरह सलूक किया जाता था और
उनसे मेहनत का काम करवाया जाता था |
और अगर कोई कैदी थोरी सी भी गलती करता था तो उन्हें
तत्काल मार दिया जाता था |
एक तरफ जहाँ इतने बुरे हालत थे वही दूसरी तरफ विक्टर
ने अपने आप को जिन्दा रखा | उस हालत में भी उन्होंने अपने जीवन का आर्थ ढूँढा |
उन्होंने अपनी थ्योरी मनोचिकित्सा पद्धति में इन्सान
को अपने मुश्किल से मुश्किल हालातों में भी अपने जीवन के लिए एक लक्ष्य ढूढने में
मदद की |
किताब के दूसरे पहलू की बात करें तो यह किताब ऐन्ना
फ्रैंक से जुड़ी हुई है जहां हमने ऐन्ना फ्रैंक की डायरी में पढ़ा था कि किस तरह ऐन्ना फ्रैंक और
उसका परिवार 2 साल तक छुपते रहे
और आखिरकार उसके बाद उन्हें पकड़ लिया गया
और उसके बाद उन्हें यातना गृह मैं ले जाया
गया वहीं यातना गृह में ले जाने के बाद कुछ ही दिनों में ऐन्ना फ्रैंक की मृत्यु
हो गई थी|
मान लेते हैं कि अगर ऐन्ना फ्रैंक की मृत्यु नहीं
होती और उसे एकाग्रता शिविरों में रहना पड़ता तो उसे किस तरह की यातनाएं सहनी
पड़ती उन्हीं यात्राओं को विक्टर फ्रैंकल ने अपनी इस किताब में बताया है कि किस
तरह से उन्हें अपने शिविरों में यातनाओं को सहना करना पड़ा , किस तरह उन्हें खाने
पीने की चीजों से दूर रहना पड़ा ,किस तरह उन्हें जानवरों की तरह काम करना पड़ा और
किस तरह से अधिकारी उनके साथ जानवरों की तरह सलूक करते थे और जरा सी गलती होने पर
उन्हें जान से मार दिया जाता था और किस तरह से वह उस एकाग्रता शिविरों से बच कर
वापिस आए इन सब के बारे में उन्होंने अपनी इस किताब में बताया गया है|
इन सबके अलावा उन्होंने हमें अपने जीवन में अपने जीवन
का लक्ष्य ढूंढने में मदद की है उन्होंने बताया है कि किस तरह हम अपने जीवन में, अपने
जीवन के लिए एक बेहतर लक्ष्य ढूंढ सकते हैं|
किताब की कुछ बेहतरीन पक्तियां –
“जो चीज बद से बदतर हालत में भी इन्सान को जीवन का
अर्थ जानने में मदद करती है वह उसके लिए संसार की सबसे महत्वपूर्ण चीज है”
“जिस मनुष्य के पास एक क्यों है वह लगभग हा हर ‘कैसे’
को सहन कर सकता है”
“हमें किसी भी आदमी को उसके जीवन के संभावित अर्थ की
तलाश करने की चुनौती देने में संकोच नहीं करना चाहिए केवल ऐसा करके ही हम उसे उसके
आलास से बाहर निकालकर जीवन के अर्थ की और भेज सकते हैं”
“अपने जो भी अनुभव पा लिया है, संसार कि कोई ही ताकत
उसे आप से छीन नहीं सकती |”
“जिंदगी हर मनुष्य से सवाल करती है और वह जिंदगी को
इस सवाल का जवाब तभी दे सकता है जब वह अपने जीवन के लिए जवाब देह हो | एक ऐसा जीवन
जिसकी वह जिम्मेदारी ले सकता हो|”
“पूरी बहादुरी के साथ अपनी पीड़ा को सहन करने की चुनौती लेते ही आपके जीवन को अंतिम क्षण तक के लिए अपना एक अर्थ मिल जाता है|”
“जिस व्यक्ति का स्वाभिमान हमेशा दूसरों से मिले आदर
मान पर टिका होता है उसे भावात्मक रूप से नष्ट होने में जरा भी देर नहीं लगती|”
“किसी भी व्यक्ति के लिए जीवन में सबसे बड़ा कार्य
यही है कि वह अपने ‘जीवन के अर्थ की तलाश करें’|”
हिंदी अनुवाद :-
जो हिंदी पाठक है वह इस किताब को हिंदी में भी पढ़
सकते है | इस किताब का हिंदी अनुवाद बहुत है अच्छा है , जो आर्थ इंग्लिश में है
उसे अर्थ को हिंदी में भी रखा गया है |
अनुवाद बहुत ही सरल और सपष्ट तरीके से किया हुआ है |
तो दोस्तों अगर आप भी अपने जीवन के लिए एक अर्थ
ढूंढना चाहते हैं तो आप इस किताब को पढ़ सकते हैं यह एक सची इतिहासिक घटना से
जुड़ी किताब हैं जिसे पढ़कर हम अपने जीवन में बहुत कुछ सीख सकते हैं और अपने जीवन
के लिए एक सच्चा लक्ष्य ढूंढ सकते हैं |
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दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें धन्यवाद

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