अमृता –इमरोज
लेखिका :- उमा त्रिलोक
कुल पेज :-130
भाषा :- हिंदी
किताब का विषय :-
यह किताब अमृता –इमरोज की कहानी है जिसमें उमा त्रिलोक जी द्वारा उनके प्रेम और अमृता जी के आखरी दिनों के बारें में बताया गया है |
यह किताब उमा त्रिलोक जी के द्वारा लिखी गई है , जिसमें उन्होंने अमृता और इमरोज से किस तरह से मुलाकात हुई और उसके बाद किस तरह से वह उनके घर आने –जाने लगी , उन्होंने लिखा है की किस तरह से उनकी गहरी मित्रता हुई अमृता जी से और वह किस तरह से उनके साथ अपनी हर बात को सांजा करने लगी |
उमा जी बताती है की अमृता और इमरोज का रिश्ता बहुत ही अनमोल था | उन दोनों की आपसी समझ बहुत ही प्यारी थी |
उमा जी ने उन दोनों की बचपन से जवानी तक की बहुत सारी बातें हमें इस किताब में बताई गई है |
किस तरह से अमृता जी ने समाज में बने रीती- रिवाजों और परम्पराओं को तोड़ कर इमरोज को अपनाया और अपना पूरा जीवन उन्ही के साथ ही व्यतीत किया था|
आपको बता दूँ की अमृता जी एक पंजाबी साहित्य की लेखिका थी और वही इमरोज एक चित्रकार थे |
इस किताब से मेरी वार्ता :-
मेरी पसंद की बात करू तो किताब मुझे बहुत पसंद आई , सबसे खास जो मुझे इस किताब में लगा वो था अमृता और इमरोज दोनों की आपसी बातचीत और एक दुसरे के बारे में बिना कुछ कहे समझ जाना |
गहरे प्रेम की सची परिभाषा है यह किताब और अमृता इमरोज की कहानी जो भी इसे पढ़ेगा , वो इस किताब में खो जायेगा |
अगर आप हिंदी पाठक है और आपको हिंदी साहित्य पढ़ना अच्छा लगता है तो आप इस किताब को जरूर पढ़े |
मेरे शब्द :-
यह किताब वास्तविक प्रेम के बारे में बताती है, समझ सको तो हंसी भरे आंसू आँख में ला देती है ,
यह अमृता –इमरोज के प्यार की वास्तविकता दर्शाती है |
:- श्याम.

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