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Sanyasi Ki Tarah Soche by Jay Shetty Hindi Book Review




यह किताब जय शेट्टी ने अपने जीवन से प्रेरणा लेकर लिखी है | जब जय शेट्टी कॉलेज में थे तो उस समय एक सन्यासी उनके कॉलेज में आए थे और उन से प्रेरित होकर उन्होंने अपने जीवन के 3 साल मुंबई में सन्यासी का प्रशिक्षण लिया था। और इसी तरह उन्होंने अपनी लाइफ को चेंज किया था |

इस किताब में उन्होंने बताया है कि किस तरह से उन्होंने अपने जीवन में एक सन्यासी की जो विचारधारा थी उसे अपनाया।

इस किताब में उन्होंने बताया है कि किस तरह हमारे लिए सन्यासी की मानसिकता जरूरी है और आज के इस व्यस्त भरे जीवन में हमारे लिए सन्यासी की विचारधारा को समझना और अपनाना बहुत ही महत्वपूर्ण है | हमें सन्यासियों से सीखना चाहिए कि किस तरह से सुखी , सम्पन रहा जाता है और अपने जीवन के सच्चे उदेश्यों को हासिल किया जाता है |

जय शेट्टी ने बताया है कि सन्यासी कोई एक व्यक्ति नहीं है जो किसी एक स्थान पर बैठकर या किसी पहाड़ी क्षेत्र में जाकर ही सन्यासी बन सकता है सन्यासी तो एक विचारधारा है जो आम आदमी भी अपने अंदर अपना सकता है ,पूरी किताब इसी पर आधारित है और उन्होंने इस किताब में योगा, मेडिटेशन को बहुत ज्यादा महत्व दिया है मेडिटेशन के महत्व को बताया है इसके अलावा उन्होंने अपने जीवन के बड़े उद्देश्य और जीवन को खुशहाल और सुख शांति से जीने के तरीके इसमें बताए हैं पूरी किताब अध्याय के अंदर बनाई गई है जिसमें उन्होंने हर अध्याय के अंत में एक प्रैक्टिकल दिया हुआ है प्रैक्टिकल को अपनाकर हम भी उसे सीख सकते हैं|

अंतत यह पूरी किताब एक सन्यासी की मानसिकता पर आधारित है किसी व्यक्ति या स्थान पर अधारित नहीं है इस किताब में जय शेट्टी ने अलग-अलग धर्म ग्रंथों से भी कुछ- कुछ अंश लिए गए हैं और उनका बहुत बढ़िया विवरण किया गया है इस किताब में जय शेट्टी ने बहुत सारी किताबों का जिक्र किया है जिसे हम पढ़ कर और भी ज्यादा समझ सकते है |

इस किताब से आप योगा , मेडिटेशन  किताबें का जीवन में बहुत महतवपूर्ण योगदान है इन सब के बारे में बहुत ही बढ़िया तरीके से बतया गया है |

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